बालदिवस की
शुभकामनाएँ
विद्यार्थी
बनो
तुम
पूर्ण
अवतार
सभ्य समाज की सर्जन
पथ
पर्
कर्म्-ज्ञान की समिधा
बन
संस्कृति-समरसता का सौरभ्
साँसों में
भरता
चल
आगे बढता
चल।
प्रगति पथ पर निरंतर
अग्रसर
हो प्रतिक्षण,
प्रतिपल, गतिशील
नव वैभव,
नव शोभा
निस्वार्थ हो
वह
परिवेश
सशक्त बनता
चल
आगे बढता
चल।
कुरीतियाँ मिटा
आश्वास
जगा
परिवर्तन समर्पण
का
चैतन्य
अनुगमन करता
चल
सुख्-शांति का सपना
सच
गढता
चल
पायी जो
शिक्षा
वह
विश्वहित अमल
करता
चल
आगे बढता
चल।
nice.. motivational poem!!!!
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