मेहरबान, कदरदान ,साहिबान
सुनो सुनो सारा हिंदुस्तान
सुनो सुनो सारा हिंदुस्तान
इतिहास हमारा विशाल है - विशाल है
इतिहास हमारा गौरवमयी है - गौरवमयी है
मंदिर इमारतें , सुंदर महल
बतलाता ये बीता हुआ कल - बीता हुआ कल
पुराने मंदिर पुराने मीनार
अनमोल हैं ये धरोहर - धरोहर, ये धरोहर
इन्हें मरम्मत करना यार - मरम्मत करना यार
हम.................... बच्चे ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा पर एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करने जा रहे हैं
चलो- चलते हैं देखते हैं हमारे मित्र क्या बताते हैं....
दृश्य - १
चार- पाँच बच्चे .... चलो ख़ूब मस्ती करेंगे....
(क) . अरे वाह ! देखो ये मीनार कितना लंबा है.... सर उठा कर खड़ा है .....
(ख) . हॉं, हॉं लंबा ही नहीं ये तो बहुत शानदार भी है
(ग) . तेरे ख़ूबसूरती पर मेरा दिल फिसल गया strongly ये जादू तेरा मुझ। पर चल गया
(घ) . अरे मुझे इतना अच्छा लगा कि मैं ने इस पर नाम भी लिख दिया ....
अरे ! मैं भी लिखता हूँ .....
दूसरा समूह ......
( क) . क्या , तुम्हें लग रहा हैं कि तुमने नेक काम किया ?
(ख ). ऐसा हर कोई अपना नाम लिखते जाएँगे तो क्या हालत होगी इन इमारतों की ????
सोचो ज़रा सोचो भाई ,
सोचो ज़रा सोचो हर कोई ........
सामूहिक गान....
चारमीनार हो कुतुबमीनार यार
जागो यार जागो ..... इसे अब तो बचालो
इसके बिना देश का शानों- शौक़त कहाँ यारों .........
दृश्य - २
वाह ! अद्भुत लाजवाब
हमारे धरोहर !!!! सुंदर , मनोहर ...... ये इमारत !!!
रोचक इतिहास जनाब ! रोचक.....
रोमांचित ये कलाकंड ... रोमांचित ये चित्रकला ...
दो आँखे कम पड़ रही है इसको देखने के लिए...
माता - पिता और बच्चे
बच्चा - १ पिताजी मुझे कुरकुरे चाहिए और साथ ही साथ chewing gum भी please
बच्चा - २ पिताजी मुझे coke tin दिला दो न .......
पिताजी - समझ में नहीं आता कहीं पर भी जाओ ये बच्चे तंग कर देते हैं.....
पता नहीं बाहर निकलते ही snacks पर टूट पड़ते हैं.......
माँ - ये लो बैग में सँभल कर रखना , अंदर जाने के बाद , घूमते समय खा लेना ।
प्रवेश द्वार पर security - बैग बताइए , मैडम , भाई साहब
माता-पिता कुछ नहीं है भैया .... सिर्फ़ पानी का बोतल है
Security का phone ring होता है , इतने में यह परिवार अंदर घुस जाता है ।
परिवार - इमारतों को देखते जाते और मस्ती से बच्चे भी खाते उन्हीं के पीछे जाते .....
थोड़ी दूर चलने के बाद......
बच्चा -( क )ये ख़त्म हो चुका है पर कहाँ इसे फेंकना है अम्माँ
माता - तुम लोग भी न नाक में दम कर देते हैं ... वहाँ side में फेंक दो ...
(माँ बच्चे की हाथ से ले लेती है और चलते चलते फेंक देती है )
बिना पूछे ही दूसरा बच्चा coke bottle को फेंक देता है
Educator - 1 अरे.... अरे.. ! ये क्या कर रहे है ?
ऐसा जहाँ चाहे वहाँ कचरा फेंकते क्या ???
आप जैसे पढ़े - लिखे लोग और ऐसा व्यवहार ........ शोभा नहीं देती .... बिलकुल नहीं...
Educator -2 आप तो जानते ही है इन्हें बनाने के लिए कलाकारों ने ख़ून - पसीना बहाया होगा !!
परिवार - किस कला की बात कर रहे हैं आप ?
पहले से ही ये टूटी - फूटी है , इनकी सुरक्षा करके क्या मिलेगा
न apartments में खेलने देते बच्चों को न हीं यहाँ !!!
हम मस्ती करने आए हैं , करने दो भैया ।
Educator - 1 नहीं सज्जन..... नहीं ऐसा नहीं बोलते.....
ये इमारत ,ये नज़ाकत .... ये धरोहर ... ये नवाबिसतान
हमारा अपना शानों- शौक़त दिखलाता है ।
हा हा हा हा हा हा हा.........
मनमाने ढंग से इनका खंडन
दिखाई नहीं दे रहा है क्या ????
बड़े आए सुंदर की बात करने .... नज़ाकत दिखाने
चलो बच्चों हम मज़ा करेंगे ........
Educator 2 सुनिए साहब ! आदर ,सत्कार हमारी संस्कृति का क़िस्सा है ।
विरासत में मिली इन चीज़ों को अमानत मान कर संभालना और सुरक्षित रखना भी तो हमारा फ़र्ज़ बनता है ।
कृपया हाथ जोड़िए मिल कर इनकी रक्षा करेंगे !!!
निकल पड़ो रे बंधु निकल पड़ो रे
निकल पड़ो रे राही निकल पड़ो रे
महल हो या क़िला हो .. महल हो या क़िला हो
इस पर मत लिखो ! ! यार इस पर मत लिखो .......... !!! बंधु इस पर मत लिखो ना ........
शिल्प हो या कला हो ........ इसको बचाना यारों इसको बचाना
निकल पड़ो रे बंधु निकल पड़ो रे...... निकल पड़ो रे राही निकल पड़ो रे ।।