आधुनिक भारत की संस्कृति एक विकसित शतदल कमल के समान है जिसका एक -एक दल एक -एक प्रांतीय भाषा और उसकी साहित्य संस्कृति है . किसी एक को मिटा देने से उस कमल की शोभा ही नष्ट हो जाएगी . हम चाहते है कि भारत की सब प्रांतीय बोलिया जिनमे सुंदर साहित्य सृष्टी हुई है ,अपने - अपने घर मे ( प्रांत मे ) रानी बनकर रहे , और आधुनिक भाषाओ के हार की मध्य मणि हिंदी भारत भारती होकर विराजती रहे .
- रबिन्द्रनाथ ठागुर
नोबुल पुरस्कार प्राप्त ठगुर जी का यह सुंदर विचार प्रत्येक भारतीय के मन को भाता है . समन्वयता की बात पर आते हैं तो यह कमाल सिर्फ भारतीय संस्कृति में ही है . गुरूदेव जी के इस विचार को मै अंतर्मन से चाहती हू और मै अपने अध्ययन - अध्यापन के अनुभावो को इसके साथ जोडना चाहती हुं. मेरे विचरो में विद्यालय भी शतदल कमल के समान है जिसका एक -एक दल एक - एक छात्र -छात्रा के समान है जिनकी सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक पृष्ठभूमि एक दूसरे से अलग होते हुये भी विद्यालय से रचित सर्वजनीन संस्कृति ( Speak Softly and Pleasantly...... Smile always.... Be Positive and Progressive.... Feel good Look good and Do good....... Have and show Confidence ) को अपना कर अपनी और विद्यालय की , समाज की और देश की शोभा बढाने में अपना योगदान दे रहे हैं और अपनी एक नयी छवि समाज में दे रहे हैं .
lots of love to my Mentors and all my Students
- रबिन्द्रनाथ ठागुर
नोबुल पुरस्कार प्राप्त ठगुर जी का यह सुंदर विचार प्रत्येक भारतीय के मन को भाता है . समन्वयता की बात पर आते हैं तो यह कमाल सिर्फ भारतीय संस्कृति में ही है . गुरूदेव जी के इस विचार को मै अंतर्मन से चाहती हू और मै अपने अध्ययन - अध्यापन के अनुभावो को इसके साथ जोडना चाहती हुं. मेरे विचरो में विद्यालय भी शतदल कमल के समान है जिसका एक -एक दल एक - एक छात्र -छात्रा के समान है जिनकी सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक पृष्ठभूमि एक दूसरे से अलग होते हुये भी विद्यालय से रचित सर्वजनीन संस्कृति ( Speak Softly and Pleasantly...... Smile always.... Be Positive and Progressive.... Feel good Look good and Do good....... Have and show Confidence ) को अपना कर अपनी और विद्यालय की , समाज की और देश की शोभा बढाने में अपना योगदान दे रहे हैं और अपनी एक नयी छवि समाज में दे रहे हैं .
lots of love to my Mentors and all my Students